Wednesday, February 4, 2009
आधुनिकता बनाम पौराणिकता
आधुनिक समाज में हम अपने आप से अक्सर यह सवाल पूछते है, हम हमारी संस्कृति से दूर क्यों होते जा रहे है। क्या यह बदलाव की निशानी है। क्या आने वालें दिनों में हम अपनी संस्कृति को पुरी तरह से भूल जायेंगे। ये सवाल अनुत्तरित रहा जाता है। हमारा देश, जो अपनी संस्कृति से विश्व भर में जाना जाता है, उसका क्या । अब सवाल ये भी उठता है की हम कौन सा पक्ष ले । हम उस दोराहे पर खड़े है जहाँ से एक रास्ता हमें साक्षात्कार करवाता है, एक विहंगम दृश्य से जिसके आलोक में हम अपने विशाल अतीत के उन सुनहरे पलों को जीने के लिए उत्साहित हो सकते है। एक अन्य रास्ता हमें एक नवीन समाज को गढ़ने को प्रोत्साहित करता है । इस समाज में नवगतो के लिए न तो कोई बंधन है और न ही रिश्तों की बुनियाद मजबूत है । इस कठिन समय में जब मानव मूल्यों का ह्रास हो रहा है, ऐसे में निर्णय की घड़ी कठिन हो गयी है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment